बारिश की तरह कोई बरसता रहे हम पर । फूल की तरह हम भी महकते चले जाएँ ।।
Monday, 30 June 2014
ऋषि पराशर जी:
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना!
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