बारिश की तरह कोई बरसता रहे हम पर । फूल की तरह हम भी महकते चले जाएँ ।।
Monday, 22 September 2014
ज़िंदगी की अंजुमन का बस यही दस्तूर है बढ़ के मिलिये और मिल के दूर होते जाइये
ज़िंदगी की अंजुमन
Monday, 30 June 2014
ऋषि पराशर जी:
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना!
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